Sunday, 31 December 2017

सुशील भोले सम्मानित..



साहित्य संदेश बागबाहरा द्वारा ग्राम खोपली में स्व . मेहतर लाल साहू स्मृति कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में कवि सुशील भोले को स्व . नारायण लाल परमार स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। 25 दिसंबर को आयोजित इस गरिमामय आयोजन में धनराज साहू, सुनिल शर्मा नील, मनीराम साहू, अशोक शर्मा, हरिकृष्ण श्रीवास्तव, रूपेश तिवारी, सहित अनेक कवि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस अवसर पर ग्राम खोपली में आयोजित कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवि सुशील भोले, सुनिल शर्मा नील, मनीराम साहू मितान, शशिभूषण स्नेही, सलीम कुरैशी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, हबीब खान समर, हरिकृण श्रीवास्तव आदि ने देर रात तक श्रोताओं को कविता रस से सराबोर किया।25 दिसंबर को आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन अशोक शर्मा ने एवं आभार प्रदर्शन के साथ ही छत्तीसगढी के प्रथम गजलकार स्व. मेहतर राम साहू जी की कविता का पाठ उनके सुपुत्र धनराज साहू ने किया।

जा रे मोर गीत तैं खदर बन ...

जा रे मोर गीत तैं खदर बन जाबे
बिना घर के मनखे बर घर बर जाबे
बने अस देखत जाबे कोनो भूख झन मरय
पेट के अगनिया बर लइका कोनो झन बेंचय
अइसन कहूं देखबे चाउंर बन जाबे---

इहू चेत करबे तैं छइहां सबला मिलय
ककरो करम ल रे घाम झन चरय
कोनो जरही भोंभरा त रूख-डार बन जाबे--

गांव-गांव किंजर के तैं खेत देखबे बढिया
तभे तो चढही चुल्हा म अन्न के रे हंड़िया
सुक्खा दिखत खेत बर बादर बन जाबे--

जभे दिखही सबो झन के चेहरा म हांसी
तब तहूं सुरता के थोरिक खा लेबे बासी
नइते अइसने सरी उमर बीताबे---

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो नं 9826992811

संस्कृति और सम्मान...

(संदर्भः आंग्ल नव वर्ष का विरोध)
हमारी संस्कृति दुनिया की हर संस्कृति और सभ्यता का सम्मान करना सिखाती है, इसीलिए पूरे विश्व को अपना परिवार मानने की शिक्षा दी जाती है। जो लोग अन्य संस्कृति, परंपरा या सभ्यता का सम्मान करने के बजाय उसके विपरित विष वमन करते हैं, ऐसे लोग कदापि धर्म के जानकार या रक्षक नहीं हो सकते। ऐसे लोगों को मूर्ख और उससे भी बढकर धूर्त कहा जाना उचित होगा। साथ ही यह भी उचित होगा कि ऐसे लोगों की बातों की उपेक्षा की जाए, उन्हें अमान्य किया जाए।

-सुशील भोले
संयोजक, आदि धर्म सभा
संजय नगर, रायपुर
मो नं 9826992811

दैनिक पत्रिका में - नवा बिहान के आस


Wednesday, 27 December 2017

आज के लइका मन बांटा म दाई-ददा ल...













आज के लइका मन बांटा म दाई-ददा ल बांट लेथें
कोन काकर संग रइही अपन हिस्सा म छांट लेथें
होथे जरूरत जब जादा एक-दूसर संग म रहे के
तब बज्जुर छाती करना परथे ए बीपत ल सहे के
मया-पिरित के बंधना लइकई-झगरा म टूट जथे
जाने कइसे ए उमर म आके देव-कृपा ह रूठ जथे

सुशील भोले 
54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 98269-92811

नवा बिहान के आस....

मुंदरहा के सुकुवा बिखहर अंधियारी रात पहाये के आरो देथे। सुकुवा के दिखथे अगास म अंजोर छरियाये के आस बंध जाथे। चिरई-चिरगुन मन चंहचंहाये लगथे, झाड़-झरोखा, तरिया-नंदिया आंखी रमजत लहराए लगथें। रात भर के खामोशी नींद के अचेतहा बेरा के कर्तव्य शून्य अवस्था ले चेतना के संसार म संघराये लगथे। तब कर्म बोध होथे, अपन धरम-करम के गोठ सुझथे, सत्-सेवा के संस्कार जागथे, अपन-बिरान अउ अनचिन्हार के पहिचान होथे।

नवा बछर घलो बीतत बछर के अनुभव के माध्यम ले लोगन ल अइसने किसम के नवा आस देथे, नवा बिसवास देथे, नवा रस्ता देथे, नवा नता-गोता, संगी-साथी अउ हितवा मन के संसार देथे। अपन पाछू के करम मन के गुन-अवगुन अउ सही गलत के पहिचान कराथे। करू-कस्सा, सरहा-गलहा मन ले पार नहकाथे, खंचका-डबरा अउ कांटा-खूंटी मन ले अलगे रेंगवाथे। तब जाके मनखे ह मनखे बनथे, वोकर छाप ह जगजग ले उज्जर अउ सुघ्घर दिखथे। लोगन ओला संहराथें, पतियाथें अउ आदर्श मान के ओकर अनुसरण करथें।
छत्तीसगढ़ अभी घलो विकास के दृष्टि ले भारी पिछड़े हवय। लगभग दू दशक बीतत हावय, एकर स्वतंत्र अस्तित्व के सिरजन होये। तभो एकर मूल आस्मिता बर कोनो बने गढऩ के सुध लेवइया नइ मिलत हे, जबकि इही अवस्था ककरो भी निर्माण के बेरा होथे। वोला सुंदर आकार, संस्कार अउ सदाचार के गुन म पागे के। आज जइसे एकर नेंव रचे जाही, तइसे काल के एकर स्वरूप बनही। सैकड़ों अउ हजारों बछर ले पर के गुलामी भोगत ये माटी के रूआं-रूआं म लूटे के, हुदरे के, चुहके के, टोरे के, फोरे के, दंदोरे के, भटकाये के, भरमाये के, तरसाये के, फटकारे के चिनहा दिखत हे। इहां के मूल निवासी समाज आज भी उपेक्षा अउ षडयंत्र के शिकार हे।

अभी घलोक एला अपन पूर्ण स्वरूप के चिन्हारी नइ मिल पाये हे। काबर ते कोनो भी राज के चिन्हारी वोकर खुद के भाखा अउ खुद के संस्कृति के स्वतंत्र पहिचान ले होथे, जे अभी तक अधूरा हे। अउ ये स्वतंत्र स्वरूप के चिन्हारी आज के पीढ़ी ल करना परही। हमर ददा-बबा मन के पीढ़ी ह एला स्वतंत्र पहिचान देवाये खातिर एक अलग प्रशासनिक ईकाई के रूप म तो बनवाये के बुता ल पूरा कर देइन। अब एकर संवागा के जोखा हम सबके हे। कइसे एला आकार देना हे, विस्तार देना हे, पहिचान देना हे, साज अउ सिंगार देना हे, ये हमार पीढ़ी के बुता आय।

ददा-बबा मन जेन सपना ल देखे रहिन हें, वो सपना ल, वो सुघ्घर रूप ल हमन ल गढऩा हे। एकर भाखा ल, साहित्य ल, कला ल, संस्कृति ल, जुन्ना आचार-व्यवहार ल, जीये के उद्देश्य अउ धर्म-संस्कार ल हमन ल बनाना हे। एकर बर पूरा ईमानदारी के साथ हर किसम के स्वारथ ले ऊपर उठ के समरपित भावना ले काम करे के जरूरत हे।

कहे के नाम ले इहां छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के गठन कर दिए गे हे। एक दशक एकरो स्थापना ल होय होगे हवय, फेर नेंग छूटे के छोंड़ ए आयोग छत्तीसगढ़ी भाषा खातिर कोनो खास बुता नइ कर पाए हे। लागथे के सरकार के या तो नीयत ईमानदार नइए नइते दस साल कम नइ होवय कोनो भाखा ल जमीनी रूप म स्थािपत करे बर। आयोग म जे मन ल सरकारी प्रतिनिधि बना के बइठारे गे हवय उहू मन हा-हा भकभक करे अउ लबारी के उपलब्धि के नाव म शेखी बघारे के छोड़ अउ कुछू नइ करंय।

छत्तीसगढ़ ल अपन पूर्ण स्वरूप के चिन्हारी मिलय इही आसा अउ बिसवास के साथ आप सबो झन ला नवा बछर के बधाई अउ जोहार-भेंट.....

सुशील भोले
54-191, डॉ. बघेल गली,
संजय नगर (टिकरापारा) रायपुर (छ.ग.)
मोबा. नं. 98269-92811

चंडी मंदिर दर्शन घुंचापाली बागबाहरा





सुशील भोले नारायण लाल परमार सम्मान से सम्मानित




साहित्य संदेश बागबाहरा द्वारा ग्राम खोपली में स्व . मेहतर लाल साहू स्मृति कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में कवि सुशील भोले को स्व . नारायण लाल परमार स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। 25 दिसंबर को आयोजित इस गरिमामय आयोजन में धनराज साहू, सुनिल शर्मा नील, मनीराम साहू, अशोक शर्मा, हरिकृष्ण श्रीवास्तव, रूपेश तिवारी, सहित अनेक कवि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

इस अवसर पर ग्राम खोपली में आयोजित कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवि सुशील भोले, सुनिल शर्मा नील, मनीराम साहू मितान, शशिभूषण स्नेही, सलीम कुरैशी, राजेन्द्र श्रीवास्तव, हबीब खान समर, हरिकृण श्रीवास्तव आदि ने देर रात तक श्रोताओं को कविता रस से सराबोर किया।25 दिसंबर को आयोजित कवि सम्मेलन का संचालन अशोक शर्मा ने एवं आभार प्रदर्शन के साथ ही छत्तीसगढी के प्रथम गजलकार स्व. मेहतर राम साहू जी की कविता का पाठ उनके सुपुत्र धनराज साहू ने किया।

Monday, 18 December 2017

जब मैं बसथंव जी मानव-सेवा के ..

जब मैं बसथंव जी मानव-सेवा के निरमल ग्रंथ म
तब काबर खोजथस तैं मोला जाति धरम अउ पंथ म
सिरतोन संगी एकरे सेती भटकत हस कतकों योनी म
अब समझ मोला पाए के रद्दा नइते फेर जाबे पुरोनी म

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

छत्तीसगढी में धन्यवाद?

छत्तीसगढी भाषा की समृद्धि को कमतर आंकने वाले अक्सर मुझसे यह प्रश्न कर बैठते हैं, कि छत्तीसगढी में धन्यवाद को क्या कहते हैं?

मैं समझ जाता हूं कि ऐसे लोगों को यहां की मूल संस्कृति का जरा भी ज्ञान नहीं है। धन्यवाद ज्ञापित करने का भावार्थ किसी के द्वारा हमारे लिए किए गये अच्छे कार्य या सहयोग का आभार व्यक्त करना होता है।

छत्तीसगढी संस्कृति में ऐसे कार्यों के लिए केवल आभार व्यक्त करने की परंपरा नहीं है , अपितु साथ में उन्हें शुभकामनाएं व्यक्त करने की भी परंपरा है। इसीलिए हमारे यहां किसी के अच्छे कार्य करने पर उसे कहा जाता है- "बने करे बाबू, भगवान तोर भला करय।" इसके लिए हम- "तोर भला होय" शब्द का उपयोग भी परिस्थिति के अनुसार कर सकते हैं।

यह हमारी संस्कृति की महानता है, हम केवल आभार व्यक्त नहीं करते, अपितु साथ में उनके लिए शुभकामनाएं भी व्यक्त करते हैं। ऐसी गौरवशाली संस्कृति से केवल आभार व्यक्त कर अपने को महान समझने की भूल करने वालों को धन्यवाद के लिए शब्द भंडार का विकल्प पूछने के बजाय इस संस्कृति गहराई को समझना और आत्मसात करना चाहिए।

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

दैवीय शक्तियों को परखने या अनुभव करने ..

दैवीय शक्तियों को परखने या अनुभव करने के लिए कुई लोग उसकी प्रक्रिया को पूर्ण करने के बजाय केवल तर्क-वितर्क करते रहते हैं, और ईश्वरीय उपस्थिति पर प्रश्नचिन्ह अंकित करते हैं। जबकि यह नियम है कि हर चीज की प्राप्ति के लिए उस नियम या प्रक्रिया को पूर्ण किया जाए। 
मान लिजिए संतान की उत्पत्ति करना है, तो निश्चित रूप से उसकी संपूर्ण प्रक्रिया को पूर्ण करना ही पड़ेगा। ऐसा ही ईश्वरीय अनुभूति या दर्शन के लिए भी आपको उसकी संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण करना ही होगा। केवल तर्क-वितर्क किसी भी परिणाम के लिए निर्धारित मार्ग नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि आप तर्कों के जाल से बाहर निकलें और तप-साधना के मार्ग पर अग्रसर हों। साधना का मार्ग और प्रतीक कुछ भी हो सकता है, परिणाम सभी के माध्यम से प्राप्त होता है।

-सुशील भोले-9826992811
संजय नगर, रायपुर

जुड़हा म मातगे हे देख ले चना..













जुड़हा म मातगे हे देख ले चना के भाजी
फतका ले भांटा संग अउ ससन भर खा जी
घर के सियानीन गे हे सिलहोय बर खार
लाही ओली भर त सब झन करबो जोहार

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

मइके छूटगे मया बिसरगे ..

















मइके छूटगे मया बिसरगे महतारी के अंगना
नान-नान बहिनी-भाई के संग म खेलना-कूदना
कइसे मोह बनाए विधाता तैं चुटकी भर सिंदूर के
कुल-गोत्र सबो तो छूटगे ददा के किस्सा कहना

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

जाति-वर्ण म बंट के तुम कइसे ..

जाति-वर्ण म बंट के तुम कइसे जुड़िहौ गढिहा
कतकों जोर लगालौ फेर नइ बनव सुग्घर बढिया
छोड़व अइसन ग्रंथ-गुरु ल जे तुंहला अलगाथे
आदि धर्म जगा फेर सिरिफ बनव छत्तीसगढिहा

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

साल बदलगे हाल बदलगे कतकों ...

साल बदलगे हाल बदलगे कतकों संगी के माल बदलगे
कथनी-करनी के तउलई म कतकों झन के चाल बदलगे
हित-पिरित के गिनती म मीत-हितवा के मोहजाल बदलगे
अइसे आइस नवा बछर के जिनगी के सुर-ताल बदलगे

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

"आवव जानन अपन मूल संस्कृति" अभियान

संगी हो, 
बाहिर ले पोथी-पतरा धर के आने वाला अउ वोकरे मानक म इहां के संस्कृति ल लिखे के उदिम करने वाला मन एमा भारी खदर-मसर कर हमर मूल चिन्हारी अउ गौरव ल लुपाय-तोपे के सरलग बुता करत हें।

एकरे सेती हमर संस्था "आदि धर्म सभा" ह इहां के मूल संस्कृति अउ अस्मिता के आरुग चिन्हारी अउ बढवार खातिर "आवव जानन अपन मूल संस्कृति" अभियान चलाए के जोखा उठाय हे।

जेन संगी मन ए विषय ऊपर कोनो किसम के व्याख्यान, संगोष्ठी या अउ कुछू कारज करना चाहथें, हमर संग भेंट कर सकथें।

-सुशील भोले
संयोजक, आदि धर्म सभा
संजय नगर, रायपुर
मो . 9826992811, 7974725684

खुदेच उठाना परथे बोझा जब ..

खुदेच उठाना परथे बोझा जब तक तन म स्वांसा हे
खोरवा-लुलुवा हो जावौ भले इही बंधना के फांसा हे
चार खांध तो तभे मिलही जब जीव शिव संग मिलही
तब तक घिलर के रेंगना परही जब तक एहर खटही

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

धरम संस्कृति के जे मन नइ...

धरम संस्कृति के जे मन नइ जानंय परिभाषा
बस रटत रहिथें अइसन मन केवल भाषा भाषा

बाहिर के पोथी रटने वाला ले कइसे करिन विश्वास
कइसे होही अइसन ले अस्मिता बर कोनो आस

ढोंग के गरभ ले नइ निकलय क्रांति के कोनो रद्दा
बस चिन्हारी करत लोगन कर देथें इनला बद्दा

अपन मूल चिन्हारी खातिर मूल धर्म अपनाना परही
बाहिर के जतका ग्रंथ-गुरु हें निच्चट तिरियाना परही

तभे आही अंजोरी इहां जब खुद के धर्म-ध्वजा लहराही
मूल आदि धर्म के छइहां म जन-जन जब जुरियाहीं

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

Sunday, 17 December 2017

गुरु बाबा के कहना हे- मनखे-मनखे ..


















गुरु बाबा के कहना हे- मनखे-मनखे एक समान
सतमारग अउ सतबानी ले ही आही नवा बिहान
नइहे कोनो छोटे-बड़े न ऊँचहा न कोनो हे नीच
सब सिरजे हे एक ज्योति ले इही सबके पहचान

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

डारा-शाखा म कतेक बिछलबे ..














डारा-शाखा म कतेक बिछलबे पेंड़वा ल सीधा धरले
जड़ संग जइसे वो ठोस रथे फेर तइसन जिनगी गढले
कतेक अमरबे पान-पतइला डारा तो रट ले टूट जाही
फेर इंकरे चक्कर म मूल घलो तोर हाथ ले छूट जाही
(जय मूल देवता-जय मूल संस्कृति)

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

जे समाज के होवय नहीं...

जे समाज के होवय नहीं स्वतंत्र कोनो चिन्हारी
पर के पाछू भटकत रहिथे इही वोकर लाचारी
धरम-संस्कृति के बात हो या शासन के गोठ
बस पिछलग्गू बने रहिथे नइ होवय कभू रोठ
अइसन बेरा ले बंचना हे त उठाव अगुवा के झंडा
नई खाहू फेर कभूच तुम तो भेद-भाव के डंडा

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

शिक्षक ल कर्मी बना के ...

शिक्षक ल कर्मी बना के बिगाड़ दिए सरकार
गुरु के महिमा घटही त वो कइसे बनही पतवार
तोरे करनी के फल आय बने कर ले पड़ताल
पढई-लिखई के रद्दा छोड़ उन करत हें हड़ताल
अइसे म कइसे होही जी इहां शिक्षा के बढवार
सोच-समझ अउ कर लइकन के रद्दा चतवार

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

जिनगी के चार दिना, कटही ...


















जिनगी के चार दिना, कटही कइसे मोर जोंही
गुन-गुन मैं सिहर जाथौं, ये भोले तोर बिना.....

हांसी हरियावय नहीं, पीरा पिंवरावय नहीं
जिनगी के गाड़ी, तोर बिन तिरावय नहीं
श्रद्धा के गांजा-धथुरा, ले के तैं हमरो ल पीना... ये भोले...

उमंग अब उवय नहीं, संसो ह सूतय नहीं
बिपदा के बैरी सिरतोन, छोरे ये छूटय नहीं
तुंहरे हे आसा एक्के, घुरुवा कस झन तो हीना... ये भोले...

तन ह तनावय नहीं, आंसू अंटावय नहीं
मया के कुंदरा जोहीं, छाये छवावय नहीं
भक्ति म भगवान बिना, मुसकिल हे हमरो जीना... ये भोले...

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

तर्क-वितर्क भाषणबाजी ले...

तर्क-वितर्क भाषणबाजी ले नइ हो जाय कोनो ज्ञानी
चटर-पटर लपराही गोठ ल हम साधना कइसे मानी
जे भटकथे अइसन के पाछू उनला अज्ञानी सिरतो जान
बिना तप-साधना के बिरथा होथे कतकों कागजी ज्ञान

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

अगहन महीना लक्ष्मी दाई के...


















अगहन महीना लक्ष्मी दाई के घर-घर होथे बास
खेत ले लुआ के धान आथे मिंजा के माढथे रास
राम के नाम ले गिनती चलथे बीस म होथे सरा
बीस सरा के एक गाड़ा तब जिनगी होथे हरा भरा

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

नवंबर महीना छत्तीसगढ, छत्तीसगढी अउ ...

नवंबर महीना छत्तीसगढ, छत्तीसगढी अउ छत्तीसगढिया मन बर बड़ महत्व के महीना होथे।1नवंबर के हमर नवा राज बने के तिथि आय त 28 नवंबर हमर महतारी भाखा छत्तीसगढी ल विधानसभा म सर्वसम्मति ले पास कर राज्य स्तर म राजभाखा के रूप म मान्यता देय के तिथि आय त काबर न ए पूरा नवंबर महीना ल छत्तीसगढ, छत्तीसगढी अउ छत्तीसगढिया महीना के रूप म विविध आयोजन के माध्यम ले मनाए जाय? 

संगी हो जइसे अभी हमन हिन्दी दिवस मनाए हावन, अपन राष्ट्रभाखा ल रंग-रंग के आयोजन कर सुमरे अउ बढवारी खातिर उदिम करे हावन, ठउका अइसनेच छत्तीसगढी खातिर घलो करे जाय।इहां के जम्मो भाखा, जम्मो संस्कृति अउ जम्मो चिन्हारी खातिर पूरा चारोंखुंट रंग-रंग के आयोजन करे जाय। सरकार के मुंह देखे ल छोड़ के अपन-अपन ठउर म अपन-अपन गांव, शहर अउ सभा-समिति म कोनो न कोनो किसम के आयोजन करन।

आप मन का कहिथव? का मोर कहना सही हे? त अपन बिचार के संग आप का आयोजन कर सकथौ या आयोजन करवा सकथौ एकर सोर-संदेशा देवव।


जम्मो झन ल जोहार


-सुशील भोले-9826992811

जाग गे चिरइया मन पारथें गोहार...












जाग गे चिरइया मन पारथें गोहार
जुड़हा जोहार ले ले जुड़हा जोहार
आना असनांदे जाबो नंदिया कछार
धर मुखारी-कपड़ा ल हब ले निकार
कतकों जाड़ दंदोरथे तभो मंजा आथे
गोरसी तापत अंगाकर घातेच सुहाथे
चारेच महीना ए बने देंह-पांव बनाले
साल भर के बांटा ल ठउका पोगराले
फेर तंदुरूस्ती म तोर आही निखार
जुड़हा जोहार ले ले जी जुड़हा जोहार

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

Friday, 24 November 2017

मौन के मारे मर जाथे जी ..

















मौन के मारे मर जाथे जी कतकों निरलज मनखे
हे अतेक ताकत एमा चाहे वो राहय कतकों तनके
एकरे सेती गुनिक जन मन एकरे सीख सिखाथें
चटर-पटर लपराही गोठ ले बांचे के रद्दा धराथें

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

धरम भूमि म आए हौ त करम
















धरम भूमि म आए हौ त करम के कोठी भरना परही
उप्पर वाला जिनगी देहे फेर खुद वोला गढना परही
भाग के रेखा तो मारग ए जेमा चलना अपने ल परथे
इही सफलता के मंत्र ए तभे दिया के अंजोर बगरथे

-सुशील भोले
संजय नगर, रायपुर
मो. 9826992811

जय भोरम देव

छत्तीसगढ में नागवंशीय राजाओं द्वारा 11 वीं सदी में निर्मित अमर कृति🌷





नर्मदा उदगम कुंड अमरकंटक







माँ शारदा देवी मैहर का प्रातः दर्शन






सती अनुसुइया आश्रम, चित्रकूट भ्रमण





चित्रकूट दर्शन, रामघाट पर मंदाकिनी स्नान





गंगा घाट पर, इलाहाबाद





गंगा दर्शन, इलाहाबाद